बिहार में का बा?

बिहार में का बा,बिहार में का बा,बिहार में का बा ?

ये लाइन आज कल बहुत सुनने और देखने को मिल रहा है कभी समाचार में और कभी टेलीविज़न पर, कभी यूट्यूब पर। इस पर बिहार की वर्तमान हालत के बारे में बताया गया है जो आज है।

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है. वैसे-वैसे चुनाव प्रचार में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार के लिए डिजिटल तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है, ताकि युवाओं को अपनी तरफ किया जा सके। ऐसे में अब भोजपुरी गाने भी चुनाव प्रचार में सुनाई देने लगी है।

 

दरअसल, विपक्ष ने सरकार से सवाल किया है कि ‘बिहार में का बा’, इसके जवाब में भाजपा ने भोजपुरी में उन्हें बताया है कि ‘बिहार में ई बा’। भाजपा की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें भोजपुरी गाने के जरिए बताया गया है कि एनडीए राज में क्या-क्या काम हुआ है।

बिहार में अब रोज़गार देने की बात हो रही है। कोई 10 लाख नौकरी देने की बात,

तो कोई 19 लाख नौकरी देने की बात कर रहा है। अब देखते है कि चुनाव जितने के बाद कौन कितना रोज़गार देने के वादे को पूरा कर पाता है।

एक दिन चुनावी वादे के कानून की मांग जरूर उठेगी और जिस दिन चुनावी वादे के

कानून बनाने आरम्भ हो जाएँगे उस दिन हमे असली लोकतंत्र देखने को मिलेगा।

तब जनता के जोश का ठिकाना नहीं रहेगा।

ऐसा नहीं कि ये चुनावी वादे वाला कानून नहीं बन सकता,ये कानून बन सकता है अगर सभी  राजनिति पार्टी कि इच्छा शक्ति साथ दे तो।

जब इस देश कि जनता अपने मताधिकार की शक्ति को पहचानेगे तभी ये हो पायेगा। वो दिन दूर नहीं,बहुत जल्द भी आएगा। जब जनता के मन और दिमाग ये सवाल उठेगा।

राजनिति इतिहास का सफर बहुत लम्बा है। कई राजनिति के नेता आये और चले गए। परन्तु किसी ने जनता कि मांग सत्तर प्रतिशत तक कभी नहीं पूरा किया।