आत्म रक्षा का अधिकार

LAW 
आई.पी.सी की धारा 96 से 106 तक राइट टू डिफेन्स का प्रावधान है।
इसके तहत हर इंसान को अपनी सुरक्षा, अपनी पत्नी की सुरक्षा, अपने बच्चों
की सुरक्षा, अपने करीबियों और सम्पति की सुरक्षा कर सकता है। कानून में 
आत्मरक्षा अधिकार क्या है?आत्म बचाव अधिकार पांच प्रकार का है।

1.लूट,रात में घर में सेंध,आगजनी चोरी आदि की अवस्था में अगर जान 
का खतरा हो तो हमला करने वाले को जान से मर देना मर्डर नहीं कहलायेगा।
2. महिला को जब यह अहसास होता है कि उस पर हमला या उसका रेप 
करने वाला है तो वो आत्मरक्षा के लिए उस इंसान कि जान ले सकती है।
3.महिला रेप की कोशिश के दौरान किसी पुरुष को घायल कर देती है।
इस के कारण उस पुरुष कि मौत हो जाती है तो इसे आत्मरक्षा कहा जायेगा।
4.किडनैप होने पर अपनी जान बचाने के लिए किडनैपर को जान से मारा जा
सकता है। इसे हत्या नहीं कहा जाएगा बल्कि सेल्फ डिफेन्स माना जाएगा।
5.एसिड अटैक करने वाले को मारना सेल्फ डिफेन्स है।ये हत्या नहीं माना
जाएगा।